क्योंकि उनसे गहरा कुछ भी नहीं!
अगर तेरी रूह को गुलाब कहूँ तो क्या ग़लत है?
क्योंकि उससे ज़्यादा खुशबूदार कुछ भी नहीं!
अगर तेरे झुमकों को आठवाँ अजूबा कहूँ तो क्या ग़लत है?
क्योंकि उनसे ज़्यादा ख़ूबसूरत कुछ भी नहीं!
अगर तेरे बालों को बादल कहूँ तो क्या ग़लत है?
क्योंकि उनसे ज़्यादा घना कुछ भी नहीं!
अगर तेरी बाहों को मंदिर कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे पवित्र कोई जगह नहीं!
अगर तेरे होंठों को शहद कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे मीठा कोई स्वाद नहीं!
अगर तेरी मुस्कान को चाँदनी कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे रोशन कोई रात नहीं!
अगर तेरे माथे की बिंदी को सूरज कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे जगमग कोई किरण नहीं!
अगर तेरी चाल को नदी की लहर कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे नाज़ुक कोई लय नहीं!
अगर तेरे नखरे को रागिनी कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे मधुर कोई सुर नहीं!
अगर तेरी काजल भरी आँखों को जादू कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे असरदार कोई तीर नहीं!
अगर तेरे पाँव की पायल को वीणा कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे मधुर कोई झंकार नहीं!
अगर तेरी हँसी को इन्द्रधनुष कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे रंगीन कोई नज़ारा नहीं!
अगर तेरे गालों की लाली को अरुणोदय कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे कोमल कोई सवेरा नहीं!
अगर तेरी बातें को ग़ज़ल कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे रूमानी कोई लफ्ज़ नहीं!
अगर तेरी मौजूदगी को जन्नत कहूं तो क्या गलत है?
क्योंकि उससे प्यारा कोई जहाँ नहीं!
----------
Agar meri ye poetry pasand aaye to please apna pyara sa comment yaha chhod jaaye ya fir mere instagram me DM karke comment jarur kare .
DM to Instagram : Aniruddh Kr. Gupta
DM to Instagram : Aniruddh Kr. Gupta

5 comments:
"तो क्या गलत है?" –
बिलकुल गलत नहीं है।
वाह.... ❣️❣️🦋
"अगर आपके कविताओं को सुकून कहूं तो
क्या गलत है?"
क्योंकि इससे ज्यादा मैं कुछ कह ही नहीं सकती 🫣😊
Thanks
Acha Ji
apke poetry se to itna prem hai ki kya hi kahe
Post a Comment