ज़रूरी है क्या.. 💔
लबों तक जो बात आये,
हर वो बात करना ज़रूरी है क्या?
इश्क़ तो सबको हो जाता है,
ये बताओ इज़हार करना ज़रूरी है क्या?
फ़रिश्ता बन हज़ार ख़्वाब दिखाकर,
झूठे वादे करना ज़रूरी है क्या?
रिश्तेदारी तो सब जानते हैं,
ये बताओ सबको अपना कहना ज़रूरी है क्या?
बरसों पहले जो आईना टूटा था,
आज वापस जुड़ने लगे तो मुश्किल है क्या?
तुमने तो मोहब्बत का अंजाम देखा है,
ये बताओ दोबारा इश्क़ करना सही है क्या?
बेइंतहां न सही, इश्क़ मैंने भी किया था,
इसका भरोसा दिलाना ज़रूरी है क्या?
तुम जो रूठ जाते हो हर छोटी सी बात पर,
हर बार तुम्हें मनाना ज़रूरी है क्या?
सूरत नहीं, सिरत पूजता हूँ,
ऐसी बातें कहना ज़रूरी है क्या?
तुम्हारे बिन मैं एक पल नहीं जी सकता,
हर एक से ये कहना ज़रूरी है क्या?
दिल के जज़्बात आँखों से टपक पड़ें,
हर आंसू दिखाना ज़रूरी है क्या?
खामोशी भी तो एक जुबान होती है,
हर दर्द को बताना ज़रूरी है क्या?
मोहब्बत अगर सच्ची है दिल से,
तो सबूतों में तोलना ज़रूरी है क्या?
धड़कनों में तुम्हारा नाम बस जाए,
तो दुनिया को बताना ज़रूरी है क्या?
रिश्ते निभते हैं एहसास से,
हर बार क़सम खाना ज़रूरी है क्या?
अगर तुम समझते हो मेरी खामोशी,
तो लफ़्ज़ों में समझाना ज़रूरी है क्या?

5 comments:
Aur agar koi na samjhe khamoshi to sb bta dena hi zaroori hota hai 😊
achha achha
❣️🦋
thanks
Keep it up 👍
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