Thursday, 12 March 2026

मेरे हिस्से का सन्नाटा , तुम्हारे हिस्से की पायल

तुम्हारे पैरों की वो चांदी की पायल,
महज़ एक ज़ेवर नहीं है,
वह एक इबादत है—
उस अनसुनी आवाज़ की, जिसे सुनने का हक़ सिर्फ मेरा था।

अजीब सन्नाटा पसरा होगा उस घर में,
जहाँ तुम चलती होगी और पायल छनकती होगी,
मगर उन दीवारों को, उन रास्तों को रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता,
कि उन घुंघरुओं में कितनी अधूरी बातें दबी हैं।

वो पायल—
कभी तुम्हारे जज़्बातों की तरह आपस में टकराती है,
कभी तुम्हारे उदास क़दमों के साथ भारी हो जाती है,
बिल्कुल उस इंतज़ार की तरह, जो हम दोनों के बीच फैला है।

मैंने आज तक उसे सुना नहीं,
मगर जब भी हवा चलती है,
मुझे महसूस होता है जैसे तुमने कहीं कोई क़दम रखा है,
और उसकी गूँज मेरे सीने के खालीपन में उतर गई है।

मैं अक्सर सोचता हूँ,
कितनी बदनसीब है वो खनक—
जो गूँजती वहाँ है जहाँ उसे कोई समझता नहीं,
और जिसे उसकी तड़प पता है, वो हज़ारों मील दूर बैठा है।
..................

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2 comments:

Anonymous said...

Yrr .... Gajab ka likhte ho ....maan gye

Anonymous said...

Bahut khub ....❣️❣️