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जानती हो,
ये गुल्लक कोई मामूली गुल्लक नहीं है!
ये हमारा 'ज्वाइंट खाता' है,
जिसमें पैसों के साथ-साथ कुछ यादें भी भरी जाएँगी।
जब हमारा गुल्लक यादों और कुछ रकम से भर जाएगा,
तब हम इसे तोड़ेंगे नहीं;
इसे घर के किसी कोने में सहेज कर रखा जाएगा।
समय आएगा, जब अपने छोटे-छोटे बच्चे होंगे,
तब उनके सामने ही ये गुल्लक खोला जाएगा।
और इसमें संचित जितनी भी धनराशि होगी,
उससे उन बच्चों के लिए खिलौने खरीदे जाएँगे।
ताकि वो जान सकें कि उनके खिलौनों की बुनियाद,
हमारे संघर्षों की नहीं, हमारे साझा प्रेम की बचत है।

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