"लहरें बेदर्द थीं, पर ममता अडिग रही।" 💔
जबलपुर के बरगी डैम में हुआ वह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि माँ के उस सर्वोच्च बलिदान की गवाही है जिसने मौत को भी निशब्द कर दिया। जब सब साथ छोड़ रहे थे, तब एक माँ ने अपनी बाहों के घेरे में अपने संसार को समेटे रखा। साँसें थम गईं, पर ममता का वो 'डेरा' आज भी अमर है।
यह चंद पंक्तियाँ उस वीरांगना माँ को एक छोटी सी श्रद्धांजलि। 🕯️🙏
जल की वे निर्मम लहरें भी, उस पल शायद रोई होंगी,
जब एक माँ ने अपनी आँखें, चिर-निद्रा में खोई होंगी।
दुनिया कहती जिसे प्रलय है, उसने ममता का रूप देखा,
काल के उस काले पन्ने पर, माँ का पावन स्वरूप देखा।
न कोई चीख, न कोई शिकवा, बस बच्चे को थामे रखा,
डूबते उस मंजर में भी, माँ का धर्म संभाले रखा।
मंदिर की मूरत क्या होगी, इस मूरत को देख ज़रा,
साँसें डूबीं, समय रुका, पर अडिग रहा ममता का डेरा।
✒️ Written by : Golu Kumar Gupta
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