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| तुम नूर हो - cover image |
ज़िंदगी में कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब वक़्त की हर करवट पर बदलता रहता है, लेकिन उनकी अहमियत कभी कम नहीं होती। वह अक्सर मुझसे पूछा करती है, और उसका यह पूछना किसी इबादत की दस्तक जैसा लगता है। कभी सुबह की उस ठंडी हवा में जब मन एकदम शांत होता है, तो कभी शाम की उस तन्हाई में जब सूरज धीरे-धीरे अपनी लाली समेट रहा होता है, वह बस एक ही सवाल करती है— "मैं तुम्हारे लिए क्या हूँ?"हैरानी होती है कि एक छोटा सा सवाल इंसान को पूरी उम्र की यादों के सफर पर ले जा सकता है। उसे लगता होगा कि शायद मैं कुछ शब्दों में इसका जवाब देकर उसे मुकम्मल कर दूँगा, पर उसे कैसे समझाऊँ कि जिसे मैंने अपनी रूह के कागज़ पर उतार लिया है, उसे चंद अल्फाजों में समेटना नामुमकिन है। यह सवाल तब भी मेरे सामने होता है जब मैं अपनी डायरी के पन्ने पलटता हूँ, और तब भी जब मैं खामोशी से रात के सन्नाटे को सुनता हूँ।
मेरे लिए वह महज़ एक नाम नहीं, बल्कि वो सुकून है जिसकी तलाश में हर मुसाफिर भटकता है। जब मेरी कलम रुक जाती है, तो वह मेरी प्रेरणा बनकर आती है। जब दुनिया का शोर बहुत बढ़ जाता है, तो वह मेरी खामोशी का घर बन जाती है। उसे जवाब देना दरअसल खुद को समझने जैसा है। वह मेरे बीते हुए कल की सीख है और आने वाले कल की सबसे खूबसूरत उम्मीद।
शायद शब्दों की अपनी एक सीमा होती है, पर दिल की भावनाओं की नहीं। इसलिए, जब उसने इस बार यह सवाल पूछा, तो मैंने अपनी चुप्पी तोड़ी और उन अहसासों को एक शक्ल देने की कोशिश की। यह कविता मेरे उसी ज़वाब का एक छोटा सा हिस्सा है, जो मैंने अपने मन के कोनों में उसके लिए संभाल कर रखा है। यह महज़ पंक्तियाँ नहीं हैं, यह मेरी उस तड़प, उस चाहत और उस अटूट विश्वास की गवाही है जो उसे मेरी हर धड़कन का हिस्सा बनाती है।
आपके सवाल का जवाब ये है कि :-
बागो की गुलाब हो,
हर सवाल का जवाब हो,
नशा में शराब हो,
दिल की नवाब हो।
तपती धूप में छाँव हो,
सुकून भरा एक गाँव हो,
मझधार में तुम नाव हो,
खुशियों का पड़ाव हो।
मेरे दिल की धड़कन हो,
सावन की तुम तड़पन हो,
माथे की तुम शिकन हो,
महका हुआ चंदन हो।
अंधेरे में तुम नूर हो,
सिर पे चढ़ा सुरूर हो,
मुझसे न कभी दूर हो,
रब का तुम दस्तूर हो।
अधूरी सी एक कहानी हो,
आँखों का मीठा पानी हो,
मेरी पूरी जिंदगानी हो,
इश्क की तुम निशानी हो।
कोरे कागज़ की तहरीर हो,
हाथों की बस लकीर हो,
मुकम्मल एक तस्वीर हो,
ख्वाबों की तुम ताबीर हो।
मंदिर की पावन आरती हो,
किस्मत जिसे संवारती हो,
जो रूह में उतरती हो,
वो दुआ जो मुझपे मरती हो।
खामोशी का तुम शोर हो,
बंधी हुई एक डोर हो,
चाहत का आखिरी छोर हो,
नाचता हुआ तुम मोर हो।
मेरी हार में तुम जीत हो,
सबसे पुराना संगीत हो,
जीवन की मीठी रीत हो,
तुम ही मेरा मनमीत हो।
साँसों की तुम रवानी हो,
बचपन की कोई कहानी हो,
सच्ची और रूहानी हो,
मेरी प्रेम-दीवानी हो।
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