Friday, 26 September 2025
गांव और नवरात्रि
Monday, 1 September 2025
चल झूठी...!
"तुम कितना झूठ बोलती हो ना।"
Friday, 29 August 2025
ख्वाबों में खोया मैं...!
कहते हैं कि मोहब्बत तब सबसे सुंदर होती है जब वह अधूरी होती है।
जब वह किसी शब्द से नहीं, बल्कि आँखों की झलक, छोटी-सी मुस्कान और अनजाने इशारों से बयां होती है।
आज मैं अपने दिल की वही अधूरी दास्तान लिख रहा हूँ — एक इंस्टा स्टोरी के बहाने, जिसने मेरे भीतर कवि को फिर से जगा दिया।
सुबह इंस्टाग्राम खोला और उसकी स्टोरी देखी।
क्लिक किया और बस! मेरी आँखें जैसे ठहर गईं।
वो खड़ी थी, चेहरा हल्की-सी रोशनी में नहाया हुआ। काजल से सजी आँखें, जिनमें कहीं गहराई में रहस्य छिपे थे।
लेकिन तस्वीर सिर्फ उसकी नहीं थी। तस्वीर में उसका पूरा कमरा बोल रहा था —
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दीवार पर घड़ी, जो उसकी हर धड़कन को समय में बांध रही थी।
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कोने में रखा पांडा टेडी, जैसे उसका वफ़ादार साथी हो।
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बिस्तर पर रखी उसकी डायरी, जो उसके दिल की हर बात लिखी जाती होगी।
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खुली हुई खिड़की, जैसे उसके सपनों का दरवाज़ा।
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बगल में रखी किताबें, जिनमें वह अपना संसार ढूँढती होगी।
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कपड़ों से भरी अलमारी, जो उसकी सादगी और रंगीनियों का संगम थी।
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और फिर वो खुद - उसकी निगाहें, उसका काजल, उसकी मासूम पर कातिल मुस्कान।
मैं उस तस्वीर को बस देखता ही रह गया।
देखते-देखते मेरे ख्यालों ने उड़ान भरी।
मैंने सोचा, अगर मैं उसके कमरे में मौजूद होता तो?
लेकिन मेरे ख्याल सीधे नहीं गए - उन्होंने मुझे उसकी हर चीज़ बनने पर मजबूर कर दिया।
काश मैं उसका आईना होता, ताकि वो रोज़ मुझमें झाँकती और मैं उसकी आँखों का संसार देखता।
काश मैं उसकी डायरी होता, ताकि वो अपने हर राज़, हर दर्द और हर सपने मुझे सौंप देती।
काश मैं उसकी घड़ी होता, ताकि हर पल उसकी नज़र मुझ पर रहती।
काश मैं उसका तकिया होता, ताकि उसकी थकान मेरी गोद में मिटती।
काश मैं उसका काजल होता, ताकि उसकी आँखों की शोभा का हिस्सा बन जाता।
इन्हीं ख्यालों में डूबते-डूबते मेरी कल्पना कविता का रूप लेने लगी।
तेरी आँखों का आईना बन जाऊँ,तेरी हर झलक में खो जाऊँ। तेरी पलकों की छाँव में रहकर, तेरे सपनों की राह सजाऊँ। तेरे चेहरे की रौशनी बनकर, तेरी मुस्कान में ढल जाऊँ। तेरे होंठों की हँसी में छुपकर, तेरे ग़मों को चुरा लाऊँ। तेरी साँसों की सरगम सुनकर, तेरे दिल का गीत गाऊँ। तेरी जुल्फ़ों की खुशबू बनकर, तेरे कंधों पर बिखर जाऊँ। तेरे तकिए की नरमी बनकर, तेरी थकान को सहलाऊँ। तेरे काजल की रेखा बनकर, तेरी आँखों में चमक बढ़ाऊँ। तेरी डायरी का पन्ना बनकर, तेरे दिल की कहानियाँ लिख पाऊँ। तेरे ख्वाबों की रात बनकर, तेरे ख़यालों में सदा ठहर जाऊँ। तेरे आँगन की हवा बनकर, तेरी जुल्फ़ों से खेल जाऊँ। तेरी घड़ी की सुई बनकर, तेरे हर पल का साथी बन जाऊँ। तेरे कमरे की खामोशी बनकर, तेरी तन्हाई में गुनगुनाऊँ। तेरे होंठों की सरगम बनकर, तेरी धड़कनों में सुर सजाऊँ। तेरे दुपट्टे की लहर बनकर, तेरी चाल में झूम जाऊँ। तेरी मुस्कान की चिंगारी बनकर, तेरे ग़मों को राख कर जाऊँ। तेरे बिस्तर की चादर बनकर, तेरे सपनों को ढँक जाऊँ। तेरी आँखों की नमी बनकर, तेरे आँसुओं में भी मुस्कराऊँ। तेरे दिल की धड़कन बनकर, तेरी मोहब्बत में सदा बहक जाऊँ।
मैं इन ख्वाबों की लहर में तैर ही रहा था कि अचानक देखा - वो स्टोरी डिलीट हो गई।
जैसे किसी ने मेरी धड़कनों से खेल लिया हो।
क्या उसने गलती से पोस्ट किया था?
क्या उसे डर था कि लोग क्या सोचेंगे?
या फिर - क्या वो सचमुच मेरे लिए थी?
दिल ने तो यही कहा - शायद वो जानती है कि मैं देखूँगा। शायद कहीं उसके दिल में भी मेरा नाम लिखा हो।
दोस्तों, मोहब्बत यही होती है।
जहाँ बाकी लोग कहेंगे कि "ये तो बस एक स्टोरी थी", वहीं एक आशिक उसे अपनी सबसे बड़ी कहानी बना देता है।
उसकी उस तस्वीर ने मुझे उसकी ज़िंदगी की गहराई दिखा दी।
उसकी हर चीज़ ने मुझसे कुछ कहा।
और जब उसने वो स्टोरी हटाई, तो मुझे लगा कि उसने कोई गुप्त संदेश भेजा है - सिर्फ मेरे लिए।
आज का दिन मेरे लिए साधारण नहीं था।
वो इंस्टा स्टोरी मेरे लिए कविता बन गई, उसकी हर चीज़ शृंगार रस की पंक्तियाँ बन गई।
क्या सचमुच वो मुझे सोच रही थी?
या फिर ये सब मेरी कल्पना है?
सच तो मुझे भी नहीं पता।
लेकिन एक बात तय है - जब तक मेरा दिल धड़कता रहेगा, ये मोहब्बत ज़िंदा रहेगी।
और जब तक मेरी कलम चलती रहेगी, ये भावनाएँ कविता बनकर बहती रहेंगी।
👉 दोस्तों, ये थी मेरी आज की दास्तान।
शायद आप सोचें कि मैं सिर्फ ख्वाबों में जी रहा हूँ। लेकिन सच कहूँ तो - प्यार की शुरुआत हमेशा ख्वाबों से ही होती है।और कभी-कभी ख्वाब ही सबसे हकीक़त वाली चीज़ लगते हैं।
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Sunday, 24 August 2025
ज़रूरी है क्या..? 💔
ज़रूरी है क्या.. 💔
लबों तक जो बात आये,
हर वो बात करना ज़रूरी है क्या?
इश्क़ तो सबको हो जाता है,
ये बताओ इज़हार करना ज़रूरी है क्या?
फ़रिश्ता बन हज़ार ख़्वाब दिखाकर,
झूठे वादे करना ज़रूरी है क्या?
रिश्तेदारी तो सब जानते हैं,
ये बताओ सबको अपना कहना ज़रूरी है क्या?
बरसों पहले जो आईना टूटा था,
आज वापस जुड़ने लगे तो मुश्किल है क्या?
तुमने तो मोहब्बत का अंजाम देखा है,
ये बताओ दोबारा इश्क़ करना सही है क्या?
बेइंतहां न सही, इश्क़ मैंने भी किया था,
इसका भरोसा दिलाना ज़रूरी है क्या?
तुम जो रूठ जाते हो हर छोटी सी बात पर,
हर बार तुम्हें मनाना ज़रूरी है क्या?
सूरत नहीं, सिरत पूजता हूँ,
ऐसी बातें कहना ज़रूरी है क्या?
तुम्हारे बिन मैं एक पल नहीं जी सकता,
हर एक से ये कहना ज़रूरी है क्या?
दिल के जज़्बात आँखों से टपक पड़ें,
हर आंसू दिखाना ज़रूरी है क्या?
खामोशी भी तो एक जुबान होती है,
हर दर्द को बताना ज़रूरी है क्या?
मोहब्बत अगर सच्ची है दिल से,
तो सबूतों में तोलना ज़रूरी है क्या?
धड़कनों में तुम्हारा नाम बस जाए,
तो दुनिया को बताना ज़रूरी है क्या?
रिश्ते निभते हैं एहसास से,
हर बार क़सम खाना ज़रूरी है क्या?
अगर तुम समझते हो मेरी खामोशी,
तो लफ़्ज़ों में समझाना ज़रूरी है क्या?
Saturday, 23 August 2025
Friday, 22 August 2025
अपनी बीबी/प्रेमिका से झगड़ा कैसे करें?
Thursday, 14 August 2025
श्रृंगार में तुम !
Saturday, 12 July 2025
एक बार गले लगा लो..!
एक बार गले लगा लो
मेरे मन के आंगन में
अब न चहचहाते हैं सपने
भावनाओं की शाखों से
झर चुके हैं सारे पत्ते
मेरे शब्दों की मिट्टी
बिना बारिश के सूख चली है
आशाओं की किरचियाँ
हर सांस में चुभने लगी हैं
हृदय की हर धड़कन
अब बस एक पुकार है
तेरे स्पर्श की गूंज
मौन में भी आकार है
तुम्हारी एक झप्पी
सर्द हवाओं में ओस सी लगे
जैसे बंजर ज़मीन पर
पहली बार बरसात जगे
तुम आओ तो
ये सूनी दीवारें बोल उठें
ये खामोश शामें
तेरी बातों में डोल उठें
प्रियतम,
बस एक बार गले लगा लो
इस टूटती चेतना में
थोड़ा जीवन जगा लो
मेरे अंदर का शून्य
तेरी ऊष्मा से भर जाएगा
जो अधूरा सा लगता हूं मैं
तेरे आलिंगन से संवर जाएगा
मुझे मेरी ही साँसों में
फिर से तुम लौटा दो
जो मरा सा जी रहा हूं
उसे जीना सिखा दो
बस एक बार
गले लगा लो
और फिर चाहे
कुछ न कहना, कुछ न लेना...
बस, मुझे फिर से "मैं" बना लो।
Friday, 11 July 2025
वो शहर
वो शहर
✍️: गोलू कुमार गुप्ता
__________________
एक शहर था
न देखा कभी, न जाना था,
न वहाँ की गलियों में
कोई मेरा ठिकाना था।
ना उसके मौसम में
मेरे ख्वाब पलते थे,
ना उसकी राहों में
मेरे कदम चलते थे।
वो बस एक नाम था —
नक़्शे पर लिखा हुआ,
ना कोई एहसास,
ना ही जज़्बातों से भरा हुआ।
मगर फिर आप मिली —
और कुछ तो बदला ज़रूर,
अब वो शहर
लगता है खुदा का नूर।
आपके होने से
वो शहर गुलज़ार हो गया,
हर कोना जैसे
आपके प्यार का इज़हार हो गया।
अब चाहूं मैं
उसी शहर में खो जाना,
आपकी धड़कनों के पास
एक झोपड़ी सा घर बना पाना।
जहां दीवारें भी
आपके नाम से गूंजें,
जहां हवाएं
आपकी खुशबू को सूंघें।
जहां सुबहें
आपके चेहरे की रौशनी से हो रोशन,
और रातें
आपके ख्वाबों में खोए हर क्षण।
जहां बारिश
आपके साथ भीगने की बात कहे,
और ठंडी हवा
आपके स्पर्श की सौगात बहे।
अब वो शहर
मुझे बसाने को बुलाता है,
आपके करीब आने का
हर दिन इक नया वादा कराता है।
कभी सोचा है आपने -
आपके होने से
एक अनजान शहर भी
कितना प्यारा हो सकता है?
नहीं न?

