Wednesday, 26 November 2025
तुमसे हसीं कोई नज़ारा नहीं मिला
Monday, 24 November 2025
पहुंच से बाहर
Sunday, 23 November 2025
बस कुछ और पल
बस कुछ और पल...
फिर यह पल भी ढल जाना है।
जो ठहरा लगता है आज,
उसका भी आगे निकल जाना है।
जो बीते दिन हैं,
बस यादों में ही सुलझ रहे,
उनको धुंधला ही हो जाना है।
बस कुछ और पल...
जो जीवन की डगर है,
रुकती नहीं, बहती जाती है,
उसको गंतव्य पर पहुंच जाना है।
बस कुछ और पल...
जो हर श्वास है आती-जाती,
जैसे हवा का झोंका हो कोई,
उसको थम कर ठहर जाना है।
बस कुछ और पल...
जो उम्मीदें हैं पनपती,
हर रोज नए ख्वाबों की तरह,
उनको स्वप्न ही बन रह जाना है।
बस कुछ और पल...
जो कल की आहट है,
आज को लीलने को आतुर,
जरा-जरा उसको अतीत हो जाना है।
बस कुछ और पल...
जो रिश्तों की तपिश है,
दिल में धड़कती मौन सी आग,
उसे भी राख बन मिट जाना है।
बस कुछ और पल…
जो मुस्कानों का कारवां है,
आँसुओं की गलियों से गुज़रता,
उसे भी ख़ामोश रात बन जाना है।
बस कुछ और पल…
फिर सब धुंधला, सब फीका,
सिर्फ़ हवाओं में नाम रह जाएंगे,
जो आज है, वो कल कहानी बन जाना है।
बस कुछ और पल…
.....
लेखक: गोलू कुमार गुप्ता
.....
Saturday, 22 November 2025
किसी और की..!
तू ख्वाब थी जो आँखों में,
अब सच्चाई है किसी और की।
जिस दिल की तू धड़कन थी,
अब धड़कन है किसी और की।
मेरी तन्हा सी रातों में,
अब रौशनी है किसी और की।
जिस राह पे तुझे माँगा था,
अब मंज़िल है किसी और की।
तेरे बिना जो अधूरा था,
अब कहानी है किसी और की।
जिस पल में तेरी यादें थीं,
अब वह घड़ी है किसी और की।
मैं जिस गीत में डूबा था,
अब वो धुन है किसी और की।
जो मुस्कान थी होंठों पे,
अब वो हँसी है किसी और की।
तेरे बिना जो वीरान था,
अब वो बस्ती है किसी और की।
जिस छाँव में सुकून मिला,
अब वो छाया है किसी और की।
तेरे नाम पे जो जिया करता,
अब ज़िंदगी है किसी और की।
तेरा हर एक इशारा था,
अब बंदगी है किसी और की।
जिस स्पर्श से दिल महका था,
अब वो खुशबू है किसी और की।
जो लहरें थीं मेरी साँसों की,
अब वो नदी है किसी और की।
तेरे लिए जो अश्क बहे,
अब वो नमी है किसी और की।
मैं रोया तेरे ख्वाबों में,
अब वो नींद है किसी और की।
जिस आँगन में तेरा नाम लिखा,
अब वो चौखट है किसी और की।
जिस रंग से तू रंगी थी,
अब वो होली है किसी और की।
तेरे लिए जो दिल धड़का,
अब वो धड़कन है किसी और की।
तू प्यार थी जो मेरा कभी,
अब चाहत है किसी और की।
- गोलू कुमार गुप्ता
Friday, 21 November 2025
मैं हार गया..!
कहता हूँ…
सब ठीक है।
पर सच ये है…
कुछ भी ठीक नहीं है।
जिस दिन तुम गई…
उस दिन सिर्फ़ तुम नहीं गईं,
कुछ मेरा भी चला गया।
और जो बचा है…
वो मैं नहीं हूँ।
मैं हार गया हूँ।
हाँ…
सीधे, साफ़, बिना बहस....
मैं हार गया हूँ।
कभी सोचा था…
मोहब्बत संभाल लूँगा,
रिश्ता बचा लूँगा,
पर देखो....
तुम चली गईं
और मैं… वहीं का वहीं रह गया।
हा, हा, हा, हा 😅😅
मजेदार है ना?
तुम चल दीं,
और मेरी दुनिया रुक गई।
वो मोड़…
जहाँ तुमने हाथ छोड़ा था,
तब समझ नहीं आया....
तुम्हारा हाथ छूटा था,
या मेरा वजूद।
उस रात चिराग बुझा नहीं था,
बस....
आख़िरी बार लौ काँपी थी।
और फिर ख़ामोशी उतर आई....
सीधी दिल में।
ठंडी।
पत्थर जैसी।
अब शहर शोर करता है,
पर भीतर सब सन्नाटा है।
लोग चलते हैं, हँसते हैं,
और मैं…
बस देखता हूँ।
बिना महसूस किए।
तुमसे शिकवा नहीं।
तुम्हें हक़ था जाने का।
शिकायत बस खुद से है....
क्यों सोचा था,
कि तुम… ठहरोगी?
रिश्ते की जो डोर थी…
कहते हैं वो टूट गई....
झूठ।
डोर नहीं टूटी…
मैं टूटा हूँ।
अब सपने नहीं आते,
इच्छाएँ नहीं जगतीं,
और दिल…
दिल अब सिर्फ़ धड़कता है,
जीता नहीं।
तो हाँ…
आज पहली बार मान रहा हूँ....
सब खत्म।
तुम।
हम।
और वो मैं....
जो प्यार करता था।
अब बस एक ठंडी सच्चाई बची है.....
मैं हार चुका हूँ।
और तुम्हारा जाना ही
मेरी कहानी का आख़िरी वाक्य था।
हां, मैं हार गया हूं।
हां, मैं हार गया हूं।
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Saturday, 15 November 2025
“बाल मेला” – बच्चों की कल्पनाओं, सीख और मुस्कान का अनोखा साप्ताहिक संगम
“बाल मेला” – बच्चों की कल्पनाओं, सीख और मुस्कान का अनोखा साप्ताहिक संगम
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बचपन… वो उम्र जब सपने रंगीन होते हैं और कल्पनाएं पंख लगाकर आसमान छूती हैं। बच्चों की इसी रंगीन दुनिया को और भी रचनात्मक, मज़ेदार और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए Kalam ki Taqat लेकर आ रहा है एक अनोखी साप्ताहिक ई-मैगज़ीन “बाल मेला”।
नाम ही बताता है—यह एक ऐसा मेला है जहाँ हर बच्चा अपनी रुचि की कोई न कोई चीज़ ज़रूर पाएगा।
आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे मोबाइल की स्क्रीन पर उलझ कर रह जाते हैं, वहीं “बाल मेला” उन्हें देगी एक सकारात्मक, रचनात्मक और सुरक्षित डिजिटल दुनिया, जहाँ वे सीख भी पाएंगे और मुस्कुराएंगे भी।
क्यों खास है ‘बाल मेला’?
“बाल मेला” सिर्फ एक मैगज़ीन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए एक पूरा मनोरंजन-उत्सव है।
हमारा उद्देश्य है बच्चों की कल्पनाशक्ति को बढ़ाना, रचनात्मकता को पंख देना, सोचने-समझने की क्षमता को मज़बूत करना और मनोरंजन के साथ सीखने का अवसर देना।
इस मैगज़ीन में हर सप्ताह बच्चों के लिए कुछ न कुछ नया, ताज़ा और मज़ेदार होगा।
मैगज़ीन की मुख्य विशेषताएं
1. बच्चों की कहानियां
हर सप्ताह नई-नई कहानियां—कभी जंगल के दोस्तों की, कभी साहस और ईमानदारी की, तो कभी रोमांच और रहस्य की।
उद्देश्य: बच्चों को कहानी के माध्यम से नैतिक मूल्य, समझ, संवेदनशीलता और रचनात्मक सोच प्रदान करना।
2. पहेली बूझो
जो दिमाग को गुदगुदाए और बच्चे को सोचने पर मजबूर करे।
“ऐसी कौन सी चीज़ है जो जितना बढ़ती है उतना ही कम दिखती है?”
ऐसी कई मज़ेदार पहेलियां हर सप्ताह बच्चों की बुद्धि को निखारने आएंगी।
3. बच्चों की कविताएं
बाल मन को सबसे ज़्यादा भाती हैं तुकबंदी और संगीतात्मक कविताएं।
हर सप्ताह प्यारी-प्यारी कविताएं—कभी फूलों पर, कभी मौसम पर, कभी दोस्ती पर—जो बच्चों की भाषा कौशल को मजबूत करेंगी।
4. दिमागी खेल (Brain Games)
पज़ल, Sudoku Kids Version, शब्द खोज (Word Search), डॉट्स जोड़ो, क्विक मैथ्स…
इससे बच्चों का IQ, तर्क शक्ति, और एकाग्रता बेहतर होगी।
5. ब्लॉग (Children’s Blog Section)
बच्चों को खुद के विचार व्यक्त करने का मौका।
एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहाँ बच्चे अपना छोटा सा ब्लॉग लिख सकते हैं—
● अपनी छुट्टियों का अनुभव
● अपनी पसंदीदा किताब
● किसी त्योहार की याद
● या कोई भी मज़ेदार बात
यह सेक्शन बच्चों में लेखन कौशल को बढ़ावा देगा।
6. चुटकुले (Jokes Junction)
क्योंकि बच्चों की हंसी से प्यारी कोई आवाज़ नहीं।
हर सप्ताह ऐसे चुटकुले जो बच्चे दोस्तों और परिवार के साथ खुशी-खुशी साझा करें।
“बाल मेला” क्यों ज़रूरी है?
✔️ आज के बच्चे डिजिटल हैं—पर उन्हें सही प्रकार का डिजिटल कंटेंट चाहिए।
✔️ किताबों से दूर होते बच्चों को दोबारा पढ़ने की ओर आकर्षित करना।
✔️ माता-पिता के लिए एक सुरक्षित, गुणवत्ता-युक्त और शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराना।
✔️ बच्चों के सर्वांगीण विकास में मदद करना—रचनात्मक, भाषाई, भावनात्मक और मानसिक विकास।
“बाल मेला” बच्चों की वही दुनिया बनाना चाहता है, जहाँ वे सीखें भी और खेलें भी।
Kalam ki Taqat का उद्देश्य
Kalam ki Taqat हमेशा से शब्दों की शक्ति और रचनात्मकता के माध्यम से समाज में सकारात्मकता लाने के लिए काम करता आया है।
“बाल मेला” उसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में हमारा एक महत्वपूर्ण कदम है।
हम चाहते हैं कि हर बच्चा—चाहे शहर का हो या गाँव का—डिजिटल माध्यम में भी सीखने और आगे बढ़ने के बेहतरीन अवसर पाए।
आप भी जुड़ें ‘बाल मेला’ से
● अपने बच्चों के लिए इसे सब्सक्राइब करें
● बच्चों को अपनी कहानी, कविता, ड्रॉइंग या ब्लॉग भेजने के लिए प्रेरित करें
● इसे स्कूलों, टीचर्स और पैरेंट्स तक पहुँचाएँ
क्योंकि जब बच्चे सीखेंगे, मुस्कुराएंगे, और सपने देखेंगे—तभी भविष्य मजबूत होगा।
अंत में…
“बाल मेला” सिर्फ एक मैगज़ीन नहीं,
यह बचपन का उत्सव,
कल्पना का संसार,
और सीख का रंगीन पुल है।
Kalam ki Taqat आपको और आपके बच्चों का इस नए सफर में स्वागत करता है।
आइए, मिलकर बच्चों की दुनिया को और सुंदर बनाएं।
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Friday, 26 September 2025
गांव और नवरात्रि
Monday, 1 September 2025
चल झूठी...!
"तुम कितना झूठ बोलती हो ना।"
Friday, 29 August 2025
ख्वाबों में खोया मैं...!
कहते हैं कि मोहब्बत तब सबसे सुंदर होती है जब वह अधूरी होती है।
जब वह किसी शब्द से नहीं, बल्कि आँखों की झलक, छोटी-सी मुस्कान और अनजाने इशारों से बयां होती है।
आज मैं अपने दिल की वही अधूरी दास्तान लिख रहा हूँ — एक इंस्टा स्टोरी के बहाने, जिसने मेरे भीतर कवि को फिर से जगा दिया।
सुबह इंस्टाग्राम खोला और उसकी स्टोरी देखी।
क्लिक किया और बस! मेरी आँखें जैसे ठहर गईं।
वो खड़ी थी, चेहरा हल्की-सी रोशनी में नहाया हुआ। काजल से सजी आँखें, जिनमें कहीं गहराई में रहस्य छिपे थे।
लेकिन तस्वीर सिर्फ उसकी नहीं थी। तस्वीर में उसका पूरा कमरा बोल रहा था —
-
दीवार पर घड़ी, जो उसकी हर धड़कन को समय में बांध रही थी।
-
कोने में रखा पांडा टेडी, जैसे उसका वफ़ादार साथी हो।
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बिस्तर पर रखी उसकी डायरी, जो उसके दिल की हर बात लिखी जाती होगी।
-
खुली हुई खिड़की, जैसे उसके सपनों का दरवाज़ा।
-
बगल में रखी किताबें, जिनमें वह अपना संसार ढूँढती होगी।
-
कपड़ों से भरी अलमारी, जो उसकी सादगी और रंगीनियों का संगम थी।
-
और फिर वो खुद - उसकी निगाहें, उसका काजल, उसकी मासूम पर कातिल मुस्कान।
मैं उस तस्वीर को बस देखता ही रह गया।
देखते-देखते मेरे ख्यालों ने उड़ान भरी।
मैंने सोचा, अगर मैं उसके कमरे में मौजूद होता तो?
लेकिन मेरे ख्याल सीधे नहीं गए - उन्होंने मुझे उसकी हर चीज़ बनने पर मजबूर कर दिया।
काश मैं उसका आईना होता, ताकि वो रोज़ मुझमें झाँकती और मैं उसकी आँखों का संसार देखता।
काश मैं उसकी डायरी होता, ताकि वो अपने हर राज़, हर दर्द और हर सपने मुझे सौंप देती।
काश मैं उसकी घड़ी होता, ताकि हर पल उसकी नज़र मुझ पर रहती।
काश मैं उसका तकिया होता, ताकि उसकी थकान मेरी गोद में मिटती।
काश मैं उसका काजल होता, ताकि उसकी आँखों की शोभा का हिस्सा बन जाता।
इन्हीं ख्यालों में डूबते-डूबते मेरी कल्पना कविता का रूप लेने लगी।
तेरी आँखों का आईना बन जाऊँ,तेरी हर झलक में खो जाऊँ। तेरी पलकों की छाँव में रहकर, तेरे सपनों की राह सजाऊँ। तेरे चेहरे की रौशनी बनकर, तेरी मुस्कान में ढल जाऊँ। तेरे होंठों की हँसी में छुपकर, तेरे ग़मों को चुरा लाऊँ। तेरी साँसों की सरगम सुनकर, तेरे दिल का गीत गाऊँ। तेरी जुल्फ़ों की खुशबू बनकर, तेरे कंधों पर बिखर जाऊँ। तेरे तकिए की नरमी बनकर, तेरी थकान को सहलाऊँ। तेरे काजल की रेखा बनकर, तेरी आँखों में चमक बढ़ाऊँ। तेरी डायरी का पन्ना बनकर, तेरे दिल की कहानियाँ लिख पाऊँ। तेरे ख्वाबों की रात बनकर, तेरे ख़यालों में सदा ठहर जाऊँ। तेरे आँगन की हवा बनकर, तेरी जुल्फ़ों से खेल जाऊँ। तेरी घड़ी की सुई बनकर, तेरे हर पल का साथी बन जाऊँ। तेरे कमरे की खामोशी बनकर, तेरी तन्हाई में गुनगुनाऊँ। तेरे होंठों की सरगम बनकर, तेरी धड़कनों में सुर सजाऊँ। तेरे दुपट्टे की लहर बनकर, तेरी चाल में झूम जाऊँ। तेरी मुस्कान की चिंगारी बनकर, तेरे ग़मों को राख कर जाऊँ। तेरे बिस्तर की चादर बनकर, तेरे सपनों को ढँक जाऊँ। तेरी आँखों की नमी बनकर, तेरे आँसुओं में भी मुस्कराऊँ। तेरे दिल की धड़कन बनकर, तेरी मोहब्बत में सदा बहक जाऊँ।
मैं इन ख्वाबों की लहर में तैर ही रहा था कि अचानक देखा - वो स्टोरी डिलीट हो गई।
जैसे किसी ने मेरी धड़कनों से खेल लिया हो।
क्या उसने गलती से पोस्ट किया था?
क्या उसे डर था कि लोग क्या सोचेंगे?
या फिर - क्या वो सचमुच मेरे लिए थी?
दिल ने तो यही कहा - शायद वो जानती है कि मैं देखूँगा। शायद कहीं उसके दिल में भी मेरा नाम लिखा हो।
दोस्तों, मोहब्बत यही होती है।
जहाँ बाकी लोग कहेंगे कि "ये तो बस एक स्टोरी थी", वहीं एक आशिक उसे अपनी सबसे बड़ी कहानी बना देता है।
उसकी उस तस्वीर ने मुझे उसकी ज़िंदगी की गहराई दिखा दी।
उसकी हर चीज़ ने मुझसे कुछ कहा।
और जब उसने वो स्टोरी हटाई, तो मुझे लगा कि उसने कोई गुप्त संदेश भेजा है - सिर्फ मेरे लिए।
आज का दिन मेरे लिए साधारण नहीं था।
वो इंस्टा स्टोरी मेरे लिए कविता बन गई, उसकी हर चीज़ शृंगार रस की पंक्तियाँ बन गई।
क्या सचमुच वो मुझे सोच रही थी?
या फिर ये सब मेरी कल्पना है?
सच तो मुझे भी नहीं पता।
लेकिन एक बात तय है - जब तक मेरा दिल धड़कता रहेगा, ये मोहब्बत ज़िंदा रहेगी।
और जब तक मेरी कलम चलती रहेगी, ये भावनाएँ कविता बनकर बहती रहेंगी।
👉 दोस्तों, ये थी मेरी आज की दास्तान।
शायद आप सोचें कि मैं सिर्फ ख्वाबों में जी रहा हूँ। लेकिन सच कहूँ तो - प्यार की शुरुआत हमेशा ख्वाबों से ही होती है।और कभी-कभी ख्वाब ही सबसे हकीक़त वाली चीज़ लगते हैं।
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Sunday, 24 August 2025
ज़रूरी है क्या..? 💔
ज़रूरी है क्या.. 💔
लबों तक जो बात आये,
हर वो बात करना ज़रूरी है क्या?
इश्क़ तो सबको हो जाता है,
ये बताओ इज़हार करना ज़रूरी है क्या?
फ़रिश्ता बन हज़ार ख़्वाब दिखाकर,
झूठे वादे करना ज़रूरी है क्या?
रिश्तेदारी तो सब जानते हैं,
ये बताओ सबको अपना कहना ज़रूरी है क्या?
बरसों पहले जो आईना टूटा था,
आज वापस जुड़ने लगे तो मुश्किल है क्या?
तुमने तो मोहब्बत का अंजाम देखा है,
ये बताओ दोबारा इश्क़ करना सही है क्या?
बेइंतहां न सही, इश्क़ मैंने भी किया था,
इसका भरोसा दिलाना ज़रूरी है क्या?
तुम जो रूठ जाते हो हर छोटी सी बात पर,
हर बार तुम्हें मनाना ज़रूरी है क्या?
सूरत नहीं, सिरत पूजता हूँ,
ऐसी बातें कहना ज़रूरी है क्या?
तुम्हारे बिन मैं एक पल नहीं जी सकता,
हर एक से ये कहना ज़रूरी है क्या?
दिल के जज़्बात आँखों से टपक पड़ें,
हर आंसू दिखाना ज़रूरी है क्या?
खामोशी भी तो एक जुबान होती है,
हर दर्द को बताना ज़रूरी है क्या?
मोहब्बत अगर सच्ची है दिल से,
तो सबूतों में तोलना ज़रूरी है क्या?
धड़कनों में तुम्हारा नाम बस जाए,
तो दुनिया को बताना ज़रूरी है क्या?
रिश्ते निभते हैं एहसास से,
हर बार क़सम खाना ज़रूरी है क्या?
अगर तुम समझते हो मेरी खामोशी,
तो लफ़्ज़ों में समझाना ज़रूरी है क्या?
